अचानक हुई एक प्रेरणादायक और यादगार मुलाकात
जीवन की लंबी यात्रा में कुछ क्षण ऐसे आते हैं जिनका होना नियति जैसा लगता है। वे न तो पहले से सोचे होते हैं और न ही किसी योजना के तहत घटित होते हैं, लेकिन उनका प्रभाव दिल पर इतना गहरा होता है कि वे हमेशा के लिए एक सुंदर स्मृति बन जाते हैं।
जोधपुर एयरपोर्ट पर ऐसा ही एक प्रेरणादायक और अविस्मरणीय पल तब आया, जब सुथार समाज के प्रतिष्ठित भामाशाह, समाजसेवी, उद्योगपति तथा संत-स्वभाव और सादगी की मिसाल श्री पूनम जी कुलरिया, सुपुत्र संत श्री दुलाराम जी कुलरिया, से अचानक भेंट हुई।
श्री पूनम जी कुलरिया वह व्यक्तित्व हैं जिनकी प्रसिद्धि केवल राजस्थान या भारत तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे विश्व में फैली हुई है। समाजसेवा, उदारता, सरलता और विनम्रता—ये चारों गुण उनके व्यक्तित्व की पहचान हैं। उनसे मिलते ही यह सहज रूप से महसूस हो जाता है कि बड़े पद और बड़ा काम करने वाले लोग हमेशा बड़े दिल के भी होते हैं।
उनकी मुस्कान में अपनत्व, वाणी में मधुरता और व्यक्तित्व में अद्भुत शालीनता है। यह वही गुण हैं जो विरले ही किसी में देखने को मिलते हैं और जो उन्हें समाज में अत्यंत विशिष्ट और सम्माननीय बनाते हैं।
उसी दिन जांगिड़ ब्राह्मण समाज, चेन्नई के अध्यक्ष आदरणीय कन्हैयालाल जी मांकड़ और कोषाध्यक्ष हीरालाल जोहड़ भी उसी फ्लाइट से बेंगलुरु की यात्रा पर थे। भाग्य का अद्भुत संयोग ऐसा बना कि फ्लाइट से पूर्व जोधपुर एयरपोर्ट पर लगभग 10 मिनट का यह सौभाग्यशाली मिलन हो पाया।
समय भले ही सीमित था, परंतु इन कुछ मिनटों ने मन में नई सकारात्मकता, उत्साह और प्रेरणा भर दी।
बातचीत के दौरान श्री पूनम जी कुलरिया का शांत, संयमित और संतुलित व्यक्तित्व गहराई से प्रभावित कर गया। यह देखकर हृदय में गर्व की अनुभूति हुई कि वे अपने पिता संत श्री दुलाराम जी कुलरिया द्वारा दी गई संस्कारधारा—सादगी, सेवा, विनम्रता और मानवता—को आज भी उसी भावना के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
उनके शब्दों में गहन विचार, व्यवहार में विनम्रता और हृदय में समाज के लिए अपार प्रेम स्पष्ट दिखाई देता है।
वास्तव में, ऐसे महापुरुषों की उपस्थिति ही वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा भर देती है।
यह छोटी-सी मुलाकात एक साधारण घटना नहीं, बल्कि एक अद्भुत अनुभव था—जिसने यह अहसास कराया कि महानता पद, संपत्ति या प्रसिद्धि से नहीं, बल्कि इंसान के चरित्र और उसके व्यवहार से मापी जाती है।
श्री पूनम जी कुलरिया जैसे संत-स्वभाव और सादगी से भरे व्यक्तित्व से मिलना वास्तव में सौभाग्य की बात है।
यह 10 मिनट का समय भले ही क्षणभंगुर था, लेकिन यह मुलाकात जीवन की स्मृतियों में हमेशा एक उजले, प्रेरणादायक और सुखद पल के रूप में संजोई जाएगी।




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