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Showing posts from October 5, 2025

मनुष्य की जीवनशैली पर चिंतन

  मनुष्य की जीवनशैली पर चिंतन ✍️ लेखक – ओमप्रकाश लदोया मनुष्य एक अद्भुत प्राणी है — विचारों, इच्छाओं और आकांक्षाओं से भरा हुआ। परंतु आज का मनुष्य अत्यंत स्वार्थी और स्वकेन्द्रित होता जा रहा है। वह हर जगह, हर क्षण, केवल अपने हित और सुख की ही कामना करता है। जब वह मंदिर 🛕 जाता है तो प्रार्थना करता है — “हे भगवान! मुझे और मेरे परिवार को सुख, शांति और समृद्धि दो।” जब किसी साधु-संत के पास जाता है तो कहता है — “महाराज, आशीर्वाद दो, मेरा भला हो जाए।” हर बार उसकी प्रार्थना “मैं” और “मेरा” के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। काम करने के समय भी यही स्वार्थ झलकता है। पहले रेट तय करेगा, और जब काम पूरा हो जाए तो कहेगा — “इतना तो ज़्यादा है, थोड़ा कम कर दो।” कभी पैसे काट लेगा, कभी कहेगा — “इतना काम क्या हुआ, बस यही तो किया।” पर यह नहीं सोचता कि सामने वाला भी मनुष्य है, उसका भी परिवार है, उसकी भी मेहनत की कीमत होती है। जब बिल्डिंग बनवाता है तो सरकार के नियमों की अवहेलना करता है। एक मंज़िल की अनुमति लेकर दो बना लेता है — बस जल्दी फायदा चाहिए। ऐसा लगता है, मानो “नियम तो दूसरों के लिए हैं, मेरे लिए नहीं।” ...