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आध्यात्मिकता क्या है? क्यों जरूरी है

 आध्यात्मिकता क्या है? क्यों जरूरी है? 




      आध्यात्मिकता कहते हैं आत्मा को परमात्मा से जोड़ना। आध्यात्मिक एक ऐसी अवधारणा है जो आत्मा या आत्म-ज्ञान से संबंधित है। यह एक व्यक्ति के भीतर की गहराई को समझने और अपने आप को जानने की प्रक्रिया है। आध्यात्मिकता का अर्थ है आत्मा को जानना, स्वयं के स्वरूप और जीवन के गहरे अर्थ की खोज करना, और भौतिक दुनिया से परे जाकर एक समय दो आंतरिक आयाम को समझना। यह किसी धर्म से बंधा नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत विकास और आंतरिक शांति से जुड़ा है, जिसमें अक्सर ध्यान, आत्म-जागरूकता और सभी प्राणियों के प्रति करुणा शामिल होती है। आध्यात्मिकता का उद्देश्य है आत्म-ज्ञान, आत्म-साक्षात्कार और मोक्ष प्राप्त करना है। आध्यात्मिकता से  बहुत लाभ ही लाभ है। इससे हमारे मन को शान्ति मिलती है मन के अंदर विचार शक्ति पैदा होती है।   आध्यात्मिकता से काम, क्रोध,  लोभ, मोह , ईर्षा , द्वेष , अहंकार जैसी बीमारियों से छुटकारा मिलता है । आध्यात्मिकता की तरफ जाने के लिए अष्टांग योग (यम ,नियम, आसन, प्राणायाम , प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि ) और पंच महायज्ञ ( ब्रह्मयज्ञ, देवयज्ञ, (हवन) बलिवैश्व देवयज्ञ, अतिथि यज्ञ ) को अपनाना पड़ेगा। मन की शान्ति के लिए, समाज सुधार के लिए, परिवार सुधार के लिए आध्यात्मिक होना बहुत जरूरी है।

आध्यात्मिकता से बहुत ही लाभ हैं जैसे :-- आध्यात्मिकता से आंतरिक शांति और संतुष्टि मिलती है, आत्म-विश्वास और आत्म-संयम बढ़ता है,नैतिकता और मूल्यों का पालन करने की प्रेरणा मिलती है, मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।

आध्यात्मिकता एक व्यक्ति के जीवन को सकारात्मक दिशा में बदलने में मदद करती है और उसे अपने वास्तविक स्वरूप को समझने में सहायता करती है।


सत्य पाल वत्स

अध्यक्ष

आध्यात्मिक प्रकोष्ठ


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