मैं हूं जांगिड़ ब्राह्मण
जांगिड़ ब्राह्मण का संक्षेप (अल्प) में परिचय,
हमारा परिचय ही जांगिड़ ब्राह्मण समुदाय से है,जो एक प्रमुख ब्राह्मण समुदाय है। जांगिड़ ब्राह्मण समुदाय का इतिहास और संस्कृति बहुत समृद्ध है, और यह समुदाय अपने विशिष्ट रीति-रिवाजों और परंपराओं के लिए के लिए जाना जाता है।
जांगिड़ ब्राह्मण समुदाय की विशेताएं
1= "संस्कृति और परंपरा" :: जांगिड़ ब्राह्मण समुदाय अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है।
2= "धार्मिक महत्व":: इस समुदाय के लोग धार्मिक गतिविधियों और अनुष्ठानों में बहुत सक्रिय होते है।
3= "शिक्षा और ज्ञान"*:: जांगिड़ ब्राह्मण समुदाय में शिक्षा और ज्ञान का बहुत महत्व दिया जाता है।
जांगिड़ की पहचान और विरासत
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1= "गर्व और सम्मान":: आपकी पहचान जांगिड़ ब्राह्मण समुदाय से होने पर आपको गर्व और सम्मान महसुस होता होगा।
2= "संस्कृति का संरक्षण":: आप अपनी संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण और प्रचार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है।
3= "समुदाय का योगदान" जांगिड़ ब्राह्मण समुदाय के सदस्य के रुप में आप समाज में सकारात्मक योग दे सकते है।
यही हमारे जांगिड़ ब्राह्मण समाज की प्राचीन समय से आजतक पहिसान बनी रही है परन्तु बदलाव संसार (प्रकृति का) का नियम है, जो सर सर सरकता है वही संसार कहलाता है और यही हमारे साथ हुआ है और हो रहा है, कारण समय के अनुसार कुछ कुछ बदलाव आधुनिक पिढ्ढी में देखने को मिल रहे है। उदाहरणार्थ सर पर सीखा (चोटी) रखना, गले खन्दे पर जनेऊ धारण करना और प्रातःकाल में यज्ञ हवन करना यह प्रतिदिन वाला कार्यक्रम से नया पिढ्ढी दूर भाग रही है यानिकि यह रिती-रिवाज अब वर्तमान में नहीं अपना रहे है। जानते है पर मानते नहीं है। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार होकर आज का युवा बहुत बड़े बड़े पदों पर आसीन है वह समाज का नाम ऊंचा उठाये रखा है। हमारी पौशाक (जेंट्स) में समयानुसार व लेडीज-ज्वेलरी व लेडीज पौशाक में बदलाव हर ऐरीया के हिसाब से देखने को मिल रहा है। वैसे देखा जाय तो हमारा जांगिड़ ब्राह्मण समाज धार्मिक पृर्वति का होने से दया माया के भाव से दयालू स्वभाव से परिपूर्ण समाज कहलाता है। ग्रामिण व्यवस्थाओं में हर दूसरे समाजों से निकट के प्रेम पूर्वक सम्बन्धों के साथ मिलकर रहते हुएं खेती बाड़ी करते हुएं लकड़ी, पत्थर, चांदी की कला में वयस्त है। अपने अपने गांवों की पंचायत (पट्टी) के निर्धारित क्षैत्र में अपने धार्मिक कार्यक्रम विश्वकर्मा मंदीरों पर और धर्मशालाओं पर विश्वकर्मा जयंती व गणेश चतुर्थी के दिन सामुहिक कार्यक्रम करते है जिसमें सम्पूर्ण निर्धारित क्षैत्र के समाज बंधू , मातृ शक्ति व बच्चों के साथ आन्नदोत्सव मनाते है। प्राचीन काल में यातायात के साधनों की कमी के कारण रिश्तें नातें 30 और 50 किलोमीटर के दायरे में ही करते थे ताकी जाने आने में सुविधा रहती थी परन्तु अब यातायात के साधन उपलब्ध होने की वजह से और समाज में पहिसान का दायरा बढ़ने से दूर दूर रिश्तें-नातें जोड़े जाने लगे है। वर्तमान में जांगिड़ ब्राह्मण समाज हर क्षैत्र में आगे (प्रगति पथ पर) बढ़ता दिखाई दे रहा है। हमारे पूर्वजों ने एक संस्था *"अखिल भारतीय जांगिड़ ब्राह्मण महासभा दिल्ली"* का निर्माण 117 बर्ष पूर्व किया था जिसके सदस्यों (महासभा के मेंबर) की संख्या आज लगभग 90 हजार के करीब है। इस संस्था का विशाल भवन दिल्ली में मुंडका में स्थित है वह शाखाएं हर राज्य में है। अब वर्तमान में इस "महासभा" के प्रधान जी श्रीमान रामपाल जी शर्मा सोडावास (बैगलोरू) वालों की तरफ से जांगिड़ ब्राह्मण समाज में "आध्यात्मिक प्रकोष्ठ " की स्थापना कर समाज के अन्दर आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचार-प्रसार कर समाज को आध्यात्म में सक्षम बनाने की योजना बनाई है, जिसमें जांगिड़ ब्राह्मण समाज के प्रबुद्ध अंगिरा वंशी ज्ञानी पंडितों की नियुक्ति की है वह प्रचार-प्रसार कार्य शुरू कर दिया है और आगे इसका विस्तार हो रहा है। इस तरह यह जांगिड़ ब्राह्मण समाज प्रगति के लिए देश में एक चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां कला कृति के कार्य, फर्नीचर (इंटेरियर) विडियो बस बाँडीज् की बात आती है तब सबसे आगे जांगिड़ों का नाम आता है और अब विज्ञान के क्षैत्र में, आई. टी. क्षैत्र में और व्यौपार में भी यह जांगिड़ समाज कार्यरत है।
जीवन में अपने उद्देश्य में सफलता हासिल करने के लिए संघर्ष (कर्म) करना प्रकृति का नियम है तो पुरुषार्थ करना प्रभु का (वेदों का) उपदेश है, कारण पुरुषार्थ से ही अपनी मन चाही मंझील हासिल होती है।
जय श्री ब्रह्म ऋषि अंगिरा जी महाराज की
"" "" "" ""उद्देश्य.........
वैचारिक क्रांति चरित्र निर्माण सकारात्मकता का महाअभियान के लेखक......⬇️
लेखक कवि दलीचंद जांगिड़ सातारा महाराष्ट्र
मोबाइल 9421215933

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