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Showing posts from October, 2025

आध्यात्मिकता क्या है? क्यों जरूरी है

  आध्यात्मिकता क्या है? क्यों जरूरी है?        आध्यात्मिकता कहते हैं आत्मा को परमात्मा से जोड़ना। आध्यात्मिक एक ऐसी अवधारणा है जो आत्मा या आत्म-ज्ञान से संबंधित है। यह एक व्यक्ति के भीतर की गहराई को समझने और अपने आप को जानने की प्रक्रिया है। आध्यात्मिकता का अर्थ है आत्मा को जानना, स्वयं के स्वरूप और जीवन के गहरे अर्थ की खोज करना, और भौतिक दुनिया से परे जाकर एक समय दो आंतरिक आयाम को समझना। यह किसी धर्म से बंधा नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत विकास और आंतरिक शांति से जुड़ा है, जिसमें अक्सर ध्यान, आत्म-जागरूकता और सभी प्राणियों के प्रति करुणा शामिल होती है। आध्यात्मिकता का उद्देश्य है आत्म-ज्ञान, आत्म-साक्षात्कार और मोक्ष प्राप्त करना है। आध्यात्मिकता से  बहुत लाभ ही लाभ है। इससे हमारे मन को शान्ति मिलती है मन के अंदर विचार शक्ति पैदा होती है।   आध्यात्मिकता से काम, क्रोध,  लोभ, मोह , ईर्षा , द्वेष , अहंकार जैसी बीमारियों से छुटकारा मिलता है । आध्यात्मिकता की तरफ जाने के लिए अष्टांग योग (यम ,नियम, आसन, प्राणायाम , प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि ) और प...

मनुष्य की जीवनशैली पर चिंतन

  मनुष्य की जीवनशैली पर चिंतन ✍️ लेखक – ओमप्रकाश लदोया मनुष्य एक अद्भुत प्राणी है — विचारों, इच्छाओं और आकांक्षाओं से भरा हुआ। परंतु आज का मनुष्य अत्यंत स्वार्थी और स्वकेन्द्रित होता जा रहा है। वह हर जगह, हर क्षण, केवल अपने हित और सुख की ही कामना करता है। जब वह मंदिर 🛕 जाता है तो प्रार्थना करता है — “हे भगवान! मुझे और मेरे परिवार को सुख, शांति और समृद्धि दो।” जब किसी साधु-संत के पास जाता है तो कहता है — “महाराज, आशीर्वाद दो, मेरा भला हो जाए।” हर बार उसकी प्रार्थना “मैं” और “मेरा” के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। काम करने के समय भी यही स्वार्थ झलकता है। पहले रेट तय करेगा, और जब काम पूरा हो जाए तो कहेगा — “इतना तो ज़्यादा है, थोड़ा कम कर दो।” कभी पैसे काट लेगा, कभी कहेगा — “इतना काम क्या हुआ, बस यही तो किया।” पर यह नहीं सोचता कि सामने वाला भी मनुष्य है, उसका भी परिवार है, उसकी भी मेहनत की कीमत होती है। जब बिल्डिंग बनवाता है तो सरकार के नियमों की अवहेलना करता है। एक मंज़िल की अनुमति लेकर दो बना लेता है — बस जल्दी फायदा चाहिए। ऐसा लगता है, मानो “नियम तो दूसरों के लिए हैं, मेरे लिए नहीं।” ...